नहीं सकूंगा अर्थात्, मन को स्थिर करते हो, क्यों नहीं सकोगे, कोशिश तो करो। नहीं सकूंगा अर्थात्, मन को स्थिर करते हो, क्यों नहीं सकोगे, कोशिश तो करो।
घर गृहस्थी की डोर पांडुरंग चरणी अर्पण, अभंग- कीर्तन से उच्चकोटी उपदेश बहुजन घर गृहस्थी की डोर पांडुरंग चरणी अर्पण, अभंग- कीर्तन से उच्चकोटी उपदेश बहुजन
पथ है हमारे सनातन धर्म जगकल्याण के लिए। पथ है हमारे सनातन धर्म जगकल्याण के लिए।
याद कर लेना एक बार बाके बिहारी को याद कर लेना एक बार बाके बिहारी को
कान्हा कब होगी फुरसत आपको पुछोगे अपने भक्तों को । कान्हा कब होगी फुरसत आपको पुछोगे अपने भक्तों को ।
पाँचवें दिन मां स्कंदमाता पूजन, छटे दिन मां कात्यानी पूजन का संदेशा लाया, पाँचवें दिन मां स्कंदमाता पूजन, छटे दिन मां कात्यानी पूजन का संदेशा लाया,